1. र्थाम्बोप्लास्टिन + प्रोर्थोम्बिन + कैल्शियम = र्थोम्बिन
2. र्थोम्बिन + फाइब्रिनोजेन = फाइब्रिन
3. फाइब्रिन + रक्त रुधिराणु = रक्त का थक्का
•रुधिर प्लाज्मा के प्रोर्थोम्बिन तथा फाइब्रिनोजेन का निर्माण यकृत में विटामिन K की सहायता से होता है। विटामिन K रक्त के थक्का बनाने में सहायक होता है। सामान्यतः रक्त का थक्का 2-5 मिनट में बन जाता है।
•रक्त के थक्का बनाने के लिए अनिवार्य प्रोटीन फाइब्रिनोजेन है।
• चोट लगने के कुछ समय बाद चोट से रुधिर का बहना रुक जाता है। जिससे चोट ग्रस्त ऊतक का अत्यधिक ह्रास नहीं होता है यह एक जटिल प्राकृतिक प्रक्रिया है।
• र्थोम्बोप्लास्टिन, प्रोर्थोम्बिन एंजाइम बनता है, जो हिपेरिन को निष्क्रिय तथा प्लाज्मा प्रोटीन को सक्रिय बनाती है अत: प्रोर्थोम्बिन को र्थोम्बिन में परिवर्तित करता है।
• फाइब्रिनोजेन विटामिन-K की उपस्थिति में यकृत में बनता है। इस प्रोटीन को रक्त का थक्का बनने की क्रिया में जरुरी माना जाता है।
•र्थोम्बिन प्रोटीन पाचक एंजाइम की भातिं कार्य करता है, जो प्लाज्मा में मौजूद फाइब्रिनोजेन नामक प्रोटीन पर क्रिया करके एक अघुलनशील तन्तुमय पदार्थ का निर्माण करता है।जिसे फाइब्रिन कहते हैं। फाइब्रिन के तन्तु आपस में फसकर जाल बनाते हैं जिसमें लाल और श्वेत रक्त कणिका, प्लेटलेट्स फंस जाती है और रक्त का थक्का बन जाता है।

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