•आमाशय में भोजन 3-4 घण्टे रहता है।
•शरीर में सर्वाधिक प्रोटीन का पाचन आमाशय में होता है।
•जैसे ही भोजन आमाशय में प्रवेश करता है तो जठर ग्रंथियों के द्वारा जठर रस का स्त्राव होता है।
•आमाशय का आवरण प्रत्येक 36 घण्टों में बदलता है।
•आमाशय गाय के दुध की अपेक्षा बकरी के दुध को अधिक जल्दी पचाता है।
आमाशय के तीन प्रमुख भाग होते है:-
1. कार्डियक आमाशय ( Cardiac Stomach) :-
•आमाशय का ऊपरी भाग, जिसमें ग्रासनली खुलती है
2. फंडिक (Fundic Stomach) :- मध्य आमाशय
3. पायलोरिक (Pyloric Stomach) :-
•यह आमाशय का निचला भाग है, जो छोटी ऑत में खुलता है अर्थात शेषाग्र। इसका अन्तिम भाग पायलोरिक संकोचक द्वारा सुरक्षित रहता है।
आमाशय का कार्य:-
•यह भोजन को कुछ समय के लिए एकत्रित रखता है। फिर उसे पीसकर व तोडकर उसका आंशिक पाचन करता है इस कार्य में जठर रस का योगदान महत्वपूर्ण होता है।
जठर रस निकलने वाले एंजाइम :-
1. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
2. पेप्पसीनोजन
3. गेर्स्टिक लाइपेज
4. रेनिन
1. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl ) :-
•यह भोजन को अम्लीय रुप में बदलता है तथा भोजन के साथ आए हुए हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने का कार्य करता है
•हाइड्रोक्लोरिक अम्ल आमाशय की ऑक्सिन्टिक कोशिका से निकलता है, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के कारण जठर रस की PH ( 1.2 - 1.4 ) होती है
•जब आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मात्रा अत्यधिक हो जाती है तब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का सम्पर्क आमाशय की दीवारों से हो जाता है जिसके कारण आमाशय की दीवारों में जलन उत्पन्न होती है जिसे एसिडिटी कहा जाता है
•एसिडिटी के कारण:- अनियमित भोजन का समय, अत्यधिक मात्रा में चाय, काफी तथा एल्कोहल के सेवन से, मसालेदार भोजन के सेवन से, चिलम तथा पान मसालों के सेवन से
2. पेप्पसीनोजन:-
•यह एक निष्क्रिय एंजाइम है तथा HCl के द्वारा सक्रिय पेप्पसीन में बदलता है,
पेप्पसीनोजन - पेप्पसीन
•पेप्पसीन प्रोटीन का पाचन करती है
प्रोटीन - डाई पेप्पटान - अमीनो अम्ल
3. गेर्स्टिक लाइपेज:-
•ये वसा का पाचन करता है
वसा - वसीय अम्ल + ग्लिसराल
4. रेनिन:-
•यह एंजाइम छोटे बच्चों में पाया जाता है तथा ये एंजाइम माँ के दुध मे उपस्थित केसीन प्रोटीन का पाचन करता है
केसीन - पैराकेसीन

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