रक्त या रुधिर एक शारीरिक तरल ( द्रव) है। जो रक्त वाहिनियों के अन्दर विभिन्न अंगों में लगातार बहता रहता है रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होने वाला यह गाढ़ा, चिपचिपा, लाल रंग का द्रव्य है, एक जीवित ऊतक है। यह प्लाज्मा व रक्त कणों से मिल कर बनता है।
रक्त का रंग:-
RBC ( लाल रक्त कणिका) में हिमोग्लोबिन वर्णक पाया जाता है।तथा हिमोग्लोबिन में आयरन (Fe) नामक तत्व पाया जाता है। जिसके कारण RBC ( लाल रक्त कणिका) अथवा रुधिर या रक्त का रंग लाल होता है।
रक्त विलयन है:-
-रक्त एक कोलाइडी विलयन है।
-रक्त बफर विलयन है।
-रक्त कार्बोनिल बफर विलयन है।
रक्त की मात्रा:-
-मानव शरीर में रक्त की मात्रा शरीर के भार का 7-11% होता है।
-मानव में 5-6 लीटर रक्त या रुधिर पाया जाता है।
रक्त का PH ( Potential Hydrogen):-
-रक्त का PH ( Potential Hydrogen) मान 7.4 होता है।
-रक्त एक हल्का क्षारीय विलयन है।
रक्त के कार्य:-
-शरीर के ताप को नियंत्रण तथा शरीर की रोगों से रक्षा करना।
-शरीर के वातावरण को स्थायी बनाये रखना तथा घावों को भरना।
-रक्त का थक्का बनाना।
-ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पचा हुआ भोजन, उत्सर्जी पदार्थ एवं हार्मोन का संवहन करना।
-लैगिंग वरण में सहायता करना तथा विभिन्न अंगों में सहयोग स्थापित करना।
•महिलाओं में रक्त पुरुषों की तुलना में 0.5 लीटर रक्त कम होता है।
•रुधिर निर्माण की प्रक्रिया हिमोपोइसिस कहलातीं है।
•रक्त एक अर्द्ध ठोस तरल संयोजी ऊतक है।
रक्त में दो प्रकार के पदार्थ पाये जाते हैं:-
(A). प्लाज्मा ( Plasma)
(B). रुधिराणु (Blood Corpuscles)
(A). प्लाज्मा (Plasma) :-
-यह रक्त का अजीवित तरल भाग होता है।
-रक्त का 55% भाग प्लाज्मा है।
-इसमें 90-92% पानी, 8-10% प्रोटीन, 0.9 % लवण, और 0.1% ग्लूकोज होता है।
-प्लाज्मा में उपस्थित प्रोटीन प्लाज्मा को गाढापन देते हैं। प्लाज्मा में घुली मुख्य प्रोटीन फाइब्रिनोजेन, ग्लोब्यूलिन्स तथा एलब्युमिन्स है प्लाज्मा में प्रोटीन की कमी से टांगो व हाथों में सूजन जल के जमा होने से आती है।
-प्लाज्मा में एक मजबूत विषमपांली सैकराइड एन्टी प्रोर्थोम्बिन होता है, जो अधिक रुधिर का थक्का नहीं जमने देता है। इसे हिपेरिन भी कहते है। यह प्रोर्थोम्बिन को चोट मुक्त नलिका में सक्रिय र्थोम्बिन में परिवर्तित होने से रोकता है यह यकृत द्वारा निर्मित होता है।
प्लाज्मा के कार्य:-
ऊष्मा के परिवहन सहायता करता है प्रतिरक्षी तंत्र में सहायक, रुधिर PH का नियमन व रख - रखाव, रुधिर हानि से बचाव,
( B). रुधिराणु (Blood Corpuscles) :-
-यह रक्त का शेष 45% भाग होता है।
-इसे तीन भागों में बाटते है:-
1. लाल रक्त कणिका ( RBC- Red Blood Corpuscles)
2. श्वेत रक्त कणिका ( WBC - White Blood Corpuscles)
3. रक्त बिम्बाणु ( Blood Platelets)

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