•जीभ माँसपेशियों का बना होता है।
•जीभ का पीछे वाला भाग फ्रेनुलम से जुडा रहता है। तथा फ्रेनुलम हायाड अस्थि के द्वारा जुडा रहता है।
•जीभ पर छोटी- छोटी कलिकाए पाई जाती है जिसे स्वाद कलिकाए कहा जाता है।
•स्वाद कलिकाएँ स्वाद का ज्ञान करवाती है।
•उम्र बढने के साथ स्वाद कलिकाएँ की संख्या कम होती है जिसके कारण बुर्जुग अवस्था में स्वाद का ज्ञान कम होता है।
•कुत्ते की जीभ बाहर निकलीं हुई होती है क्योंकि फ्रेनुलम तथा हायाड के बीच खाली स्थान पाया जाता है।
•जीभ की ऊपरी सतह पर स्वाद कलिकाएं पाई जाती है, जो भोजन की प्रकृति जैसे - मीठा, खटटा, कड़वा तथा नमकीन का आभास कराती है जीभ के अग्रभाग पर मीठे, किनारे पर खड़े तथा पश्चात पर कड़वे स्वाद की कलिकाएं उपस्थित होती है
जीभ के कार्य:-
•स्वाद का ज्ञान करवाती है।
•जीभ बोलने में सहायक है।
•जीभ का नियंत्रण प्रमस्तिष्क में उपस्थिति वाणी केन्द्र के द्वारा होता है।
•जन्म से गुंगे व्यक्तियों में वाणी केन्द्र विकसित नहीं होता है इस कारण वे बोल नही पाते है।
•जीभ भोजन को घुमाने में सहायक है।

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